अनन्त जन्मों के पापों को नष्ट करते हैं भगवान : स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य

FARIDABAD  : एक भक्त के जीवन में गुरु का बड़ा महत्व है। एक गुरु अपने शिष्य को कभी भी हारने नहीं देता है। वह शिष्य को भगवान का मार्ग दिखलाते हैं जिस पर चलते हुए भक्त के अनन्त जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। यह बात श्री सिद्धदाता आश्रम के जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने कही। वह यहां दीक्षा प्राप्त कर रहे वदीक्षार्थियों को संबोधित कर रहे थे। गुरु महाराज ने कहा कि दीक्षा मानव के जीवन में विशिष्ट बदलाव लाने की प्रक्रिया है। इसके द्वारा गुरु परंपरा में आने वाले सिद्ध संत अपने शिष्य को अनुभूत ज्ञान प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि आज के कलुषित वातावरण में मानव परेशान है और उसका हल अध्यात्म है। अध्यात्म व्यक्ति को आनन्द प्रदान करता है। आनन्दित व्यक्ति ही इस लोक की क्रिया को समझ सकता है। ऐसे व्यक्ति संसार में रहते हुए भी इसके पार रहते हैं। अर्थात् वह जीवन को एक जिम्मेदारी के रूप में जीते हैं और इनमें रत् नहीं रहते हैं।
स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य ने बताया कि इस धरती को दुखालय कहा गया है लेकिन
गुरु के पास भगवान नाम की औषधि है जो दुखालय के दुखों को समाप्त कर देती
है। आप लोग प्राप्त नाम को जपें और अपने चरित्र में सकारात्मक बदलाव
लाएं, आपके जीवन में आनन्द आने लगेगा।
इससे पहले उन्होंने करीब 325 भक्तों को हवन करवाया और उन्हें यज्ञोपवीत प्रदान किया। इसके बाद भक्तों के बाजुओं पर भगवान के शंख चक्र लगाए और कान में नाम दान दिया। इस अवसर पर सुमधुर भजनों के साथ भक्तों ने शरणागति ली और जीवन में गुरु वचनों को धारण करने का प्रण लिया। नवदीक्षार्थियों का कहना था कि उन्हें आज अपने जीवन में विशेष बदलाव महसूस हो रहा है। हमें विश्वास है कि हमें गुरु महाराज इस भव सागर से पार कराएंगे। सभी ने भोजन प्रसाद भी प्राप्त किया।

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