LG ने दी मुकदमा चलाने की मंजूरी, दिल्ली पुलिस के 2 कांस्टेबल पर गबन का आरोप

दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना(LG Vinay Kumar Saxena) ने बुधवार, 18 जून को दिल्ली पुलिस (Delhi Police)के 2 पूर्व पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी है. यह मंजूरी दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 197 के तहत बर्खास्त हेड कांस्टेबल राकेश शर्मा और बर्खास्त कांस्टेबल खुशी राम के खिलाफ दी गई है. इन दोनों के खिलाफ आर्थिक अपराध शाखा (EOW) में 14 मई 2018 को मामला दर्ज किया गया था, जिसमें भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं, साथ ही आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 66 भी शामिल है.

इस मामले में गबन, धोखाधड़ी, जालसाजी और आईटी अधिनियम की धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है. दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा की जांच में यह सामने आया कि विभिन्न प्रकार के लाइसेंसों, जैसे शस्त्र लाइसेंस, होटल/गेस्ट हाउस, भोजनालय और प्रेस लाइसेंस, के नवीनीकरण और जारी करने के लिए जमा की गई फीस में गंभीर अनियमितताएँ पाई गईं. असली सॉफ्टवेयर से रसीद जारी करने के बजाय नकली रसीदें तैयार कर नकद वसूली की जा रही थी, और इन लेनदेन को सरकारी रिकॉर्ड में भी दर्ज नहीं किया गया था.

महत्वपूर्ण दस्तावेज तक कर दिए थे गायब

जांच में यह स्पष्ट हुआ कि 1 सितंबर 2016 से 20 फरवरी 2018 के बीच वित्तीय अनियमितताएँ हुई थीं. विशेष रूप से, मार्च 2017 से फरवरी 2018 के बीच हथियार लाइसेंस रिन्यूअल काउंटर नंबर-2, जिसे हेड कांस्टेबल राकेश शर्मा संचालित कर रहे थे, पर सबसे अधिक फर्जी रसीदें जारी की गईं. इस दौरान कांस्टेबल खुशी राम ने हथियार लाइसेंस रिन्यूअल डेस्क पर कैशियर की भूमिका निभाई. जांच में इन दोनों के बीच साठगांठ और गबन के संकेत मिले हैं. इसके अलावा, जांच के दौरान कई कंप्यूटर फाइलें डिलीट की गईं और महत्वपूर्ण दस्तावेज भी गायब पाए गए.

फर्जी रसीद प्रारूप किया तैयार

जांच के दौरान फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की रिपोर्ट और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की चार्जशीट ने दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत प्रस्तुत किए. दिल्ली सरकार के गृह विभाग ने भी अपनी जांच के बाद यह स्वीकार किया कि हेड कांस्टेबल राकेश शर्मा और कांस्टेबल खुशी राम ने मिलकर एक फर्जी रसीद प्रारूप तैयार किया. इसके माध्यम से वे बिना आधिकारिक सॉफ्टवेयर के नकली रसीदें उत्पन्न कर रहे थे, और ये रसीदें उसी प्रिंटर से छापी जा रही थीं, जिसका उपयोग असली रसीदों के लिए किया जाता था, ताकि किसी को संदेह न हो.

दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने आज जांच में दोनों अभियुक्तों के खिलाफ पुख्ता सबूत मिलने के बाद CrPC की धारा 197 के तहत अभियोजन की अनुमति दी है. उन्होंने गृह विभाग को निर्देशित किया है कि दिल्ली पुलिस द्वारा दिल्ली पुलिस अधिनियम, 1978 की धारा 140 के तहत अभियोजन की अनुमति के लिए भेजे गए अनुरोध की समीक्षा की जाए और आवश्यक कार्रवाई की जाए l

NEWS SOURCE Credit :lalluram

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