मनरेगा में बदलाव के खिलाफ कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शन, एक दिवसीय उपवास रखकर भाजपा सरकार को चेतावनी

A2z न्यूज़ update, आप की आवाज़ महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) में प्रस्तावित बदलावों के विरोध में जिले के कांग्रेसी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने आज एन.एच.-5 स्थित महात्मा गांधी पार्क में एक दिवसीय उपवास एवं प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने मनरेगा को कमजोर करने के प्रयासों की कड़ी निंदा करते हुए मजदूरों और किसानों के अधिकारों की रक्षा का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में विधायक रघुबीर सिंह तेवतिया, पूर्व विधायक नीरज शर्मा, पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी लखन कुमार सिंगला, पूर्व प्रत्याशी विजय प्रताप सिंह, कांग्रेस प्रवक्ता एवं युवा नेता नितिन सिंगला, पराग शर्मा, महिला कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुधा भारद्वाज, प्रदेशाध्यक्ष महिला सेवादल सुनीता शर्मा, प्रदेशाध्यक्ष कांग्रेस सेवादल डॉ. पूनम चौहान सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ता मौजूद रहे।
इस अवसर पर प्रदेश प्रवक्ता एवं युवा नेता नितिन सिंगला सहित अन्य कांग्रेस नेताओं ने संयुक्त रूप से कहा कि भाजपा सरकार मनरेगा के नए नियमों के माध्यम से मजदूरों के काम करने के संवैधानिक अधिकारों को छीनने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में हर ग्रामीण परिवार को न्यूनतम 100 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी मिलती थी और प्रत्येक गांव में काम उपलब्ध कराया जाता था, लेकिन भाजपा सरकार के नए प्रावधानों में पंचायतों के पास यह अधिकार समाप्त कर दिया गया है।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि नए नियमों के तहत अब केवल केंद्र सरकार द्वारा चयनित गांवों में ही काम मिलेगा। पहले जहां पूरे वर्ष काम की मांग की जा सकती थी और न्यूनतम मजदूरी की कानूनी गारंटी थी, वहीं अब फसल कटाई के मौसम में रोजगार नहीं मिलेगा और मजदूरी भी सरकार की मनमर्जी से तय की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि पहले पंचायत के माध्यम से गांव के विकास से जुड़े कार्य कराए जाते थे और मनरेगा मेट व रोजगार सहायकों का सहयोग मिलता था, लेकिन नए नियमों में यह व्यवस्था खत्म कर दी गई है। अब यह तय होगा कि कहां और किस तरह का काम होगा, जिसे मोदी सरकार अपने पसंदीदा ठेकेदारों के जरिए संचालित करेगी।
कांग्रेस नेताओं ने बताया कि पहले मजदूरी का 100 प्रतिशत भुगतान केंद्र सरकार करती थी, जिससे राज्य सरकारों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता था। नए नियमों में राज्य सरकारों को 40 प्रतिशत मजदूरी वहन करनी होगी, जिससे खर्च के डर से रोजगार उपलब्ध न कराए जाने की आशंका है।
अंत में कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भाजपा सरकार के इस तानाशाही फैसले के खिलाफ कांग्रेस पार्टी सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष करेगी और जब तक मनरेगा में किए जा रहे ये बदलाव वापस नहीं लिए जाते, तब तक आंदोलन जारी

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