अक्षय तृतीया और भगवान परशुराम जयंती पर राहगीरों को पिलाया गन्ने का रस

Faridabad/Rakesh Kumar : अक्षय तृतीया और भगवान परशुराम जयंती के अवसर पर समाजसेवी कैलाश शर्मा व केशव शर्मा ने अपने स्टाफ के साथ मिलकर सेक्टर-24 स्थित अपने संस्थान के बाहर आने जाने वाले राहगीरों को गर्मी के इस मौसम में गन्ने का रस पिलाकर पुण्य कमाया। इस मौके पर कैलाश शर्मा ने बताया कि अक्षय तृतीया नई शुरुआत और समृद्धि का प्रतीक है। अक्षय शब्द का अर्थ स्वयं अविनाशी या अमर होता है। यह इस विश्वास को दर्शाता है कि इस दिन किए गए किसी भी कार्य को असीम सफलता और सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन को लेकर लोगों में कई मान्यताएं हैं. जिनमें से सबसे प्रमुख मान्यता ये है कि इस दिन बिना पंचांग देखे किसी भी प्रकार के मांगलिक और शुभ कार्य को किया जा सकता है। उन्होनें बताया कि भगवान परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार माने गए हैं। भगवान परशुराम कलयुग में मौजूद आठ चिरंजीवी में से एक हैं जो आज भी धरती पर मौजूद हैं। केशव शर्मा ने बताया कि अक्षय तृतीया के दिन धन योग के साथ रवि योग, शुक्रादित्य योग, मालव्य योग और भी कई शुभ योग बनते हैं। इसलिए इस राजयोग में मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करने से कई गुना अधिक फलों की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन ही युधिष्ठिर को भगवान श्रीकृष्ण ने अक्षय पात्र दिया था, जिसमें कभी भी भोजन समाप्त नहीं होता था। केशव शर्मा ने बताया कि भगवान परशुराम का जन्म अधर्मी पापी और क्रूर राजाओं का नाश करने के लिए हुआ था।

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