प्रोस्थेटिक्स और ऑर्थोटिक्स विशेषज्ञ द्वारा प्रदान किए जाने वाले उपचार और सेवाओं के महत्व को पहचानने के लिए हर साल 5 नवंबर को अंतर्राष्ट्रीय प्रोस्थेटिक्स और ऑर्थोटिक्स दिवस ( IPOD) मनाया जाता है

प्रोस्थेटिक्स और ऑर्थोटिक्स विशेषज्ञ द्वारा प्रदान किए जाने वाले उपचार और सेवाओं के महत्व को पहचानने के लिए हर साल 5 नवंबर को अंतर्राष्ट्रीय प्रोस्थेटिक्स और ऑर्थोटिक्स दिवस ( IPOD) मनाया जाता है।
इस अवसर पर ऑर्थोटिक एंड प्रोस्थेटिक एसोसिएशन ऑफ इंडिया (OPAI ) दिल्ली की ओर से, आगामी 5 नवंबर 2024 को,अंतर्राष्ट्रीय प्रोस्थेटिक एंड ऑर्थोटिक दिवस 2024 (IPOD ) हिंदी भवन दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम देशों के हर कोने से पेशेवर, प्रतिनिधि, विभाग के अधिकारी और हितधारक ज्ञान साझा करने, सहयोग को बढ़ावा देने और ऑर्थोटिक्स और प्रोस्थेटिक्स के क्षेत्र में नवीनतम प्रगति और चुनौतियों पर चर्चा करने के लिए एक साथ एकत्रित होंगे lदिव्यांगजनों एवं वरिष्ठ नागरिकों के जीवन सुधार में प्रोस्थेटिक्स और ऑर्थोटिक्स विशेषज्ञ का अहम भूमिका है.
मनुष्य के जीवन में जो विकृतियों जन्म होने से लेकर और वृद्ध होने तक की दशा में विभिन्न परेशानियों एवं बीमारियों का सामना करना पड़ता है उस सबका चिकित्सीय निवारण करने के लिए एक कुशल प्रोस्थेटिक एंड ऑर्थोटिक विशेषज्ञ का होना बहुत ही अनिवार्य है अन्यथा व्यक्ति गलत लोगों के चक्कर में आकर अपने शरीर का इस प्रकार नाश कर लेता है कि वह पुनः शर्जित करने योग्य नहीं रहता है.
आप सबको जानकर खुशी होगी कि दिव्यंगता को रोकने के लिए सरकारों एवं दिव्यांगजन
हेतु कार्य करने वाले गैर सरकारी संगठन व दिव्यांगजन के पुनर्वास में एवं इलाज करने वाले विशेषज्ञ सकारात्मक एवं कड़ी मेहनत से दिव्यंगता को रोकने का प्रयास कर रहे हैं । जो की काफी हद तक पिछले दो दशकों से कामयाब भी हुए हैं, परंतु जन जागरूकता के अभाव के कारण दिव्यंगता का प्रतिशत बढ़ता जा रहा है । जिसका मुख्य कारण जन जागरूकता का न होना है ।
इसलिए हमारी आपसे निवेदन है की दिव्यंगता को पहचान व सही विशेषज्ञ जो की दिव्यांगता को रोक सकते हैं जिसमें प्रोस्थैटिस्ट एवं ऑर्थोटीस्ट की मुख्य भूमिका है ।
सरकार एवं गैर सरकारी संगठनों द्वारा एडिप स्कीम के तहत दिव्यांगता को रोकने के लिए व उन्हें पुनर्वासित करने के कार्य के लिए बहुत बड़े-बड़े एवं देश के लगभग सभी शहरों में एवं गांव में कैंप का अयोजन किया जा रहा है , इसके के बावजूद भी दिव्यांगता का प्रतिशत बढ़ता ही जा रहा है, जिसका मुख्य कारण आम जनमानस को शारीरिक विकृति से होने वाली दिव्यंगता की सही जानकारी का अभाव है । शारीरिक विकृति को समय रहते हुए ठीक किया जा सकता है । जिसमें शारीरिक विकृति एवं दिव्यंगता को रोकने के लिए प्रोस्थेटिस्ट एवं ऑर्थोटीस्ट की समाज में मुख्य भूमिका हो सकती है । समाज में ऐसे लोगों की पहचान करें तथा सही विशेषज्ञ के बारे में मरीज को जानकारी देकर आप सब दिव्यंगता को रोकने में सहभागी हो सकते हैं । दिव्यंगता एवं जन्मजात शारीरिक विकृति जिसकी वजह से समय रहते या समय पर उपचार न मिलने की वजह से छोटी सी शारीरिक विकृति दिव्यंगता में परिवर्तित हो जाती है अथवा व्यक्ति की छोटी सी शारीरिक विकृति जिसका सही समय पर उपचार न होने के कारण उस व्यक्ति को जीवन भर दिव्यंगता का कष्ट भोगना पड़ता है।
जन सहभागिता एवं पूर्ण जानकारी से ऐसी छोटी छोटी विकृतियों को रोका जा सकता है । जिन लोगों को किसी दुर्घटना एवं गंभीर बीमारियों की वजह से हाथ पैर कट गए हैं ,वह किसी कृत्रिम अंग केंद्र जो आपके आसपास हो वहां जाकर प्रॉस्टेटिक ऑथेंटिक विशेषज्ञ के परामर्श लेकर चिकित्सा कर सकते हैं। जिसमें मरीज को सामान्य जीवन जीने के लिए मरीज के अनुकूल उच्च तकनीक के कृत्रिम अंग देकर उनके जीवन को बदला जा सकता है, जिससे वह सामान्य जीवन जी सकते हैं तथा दिव्यांगता को भी कम किया जा सकता है । मरीज अपनी रोजमर्रा के कार्य सामान्य व्यक्ति की तरह कर सकता है । जिन बच्चों के जन्मजात टेढ़े-मेढ़े पैर या फ्लैट फुट या घुटने आपस में टकराते हो, घुटने के बीच का ज्यादा गैप हो ऐसे मरीजों को प्रोस्थेटिक्स और ऑर्थोटिक्स विशेषज्ञ के परामर्श से अत्यआधुनिक मटेरियल कार्बन फाइबर एवं उच्च क्वालिटी के थर्मोप्लास्टिक ऑर्थोसिस,स्प्लिंट एवं ब्रेस की सहायता से ठीक किया जा सकता है । सही जानकारी अभाव से मरीज झोलाछाप लोगों के गलत उपचार के कारण मरीज की विकृति धीरे-धीरे कम होने की बजाय बढ़ती ही जाती है तथा दिव्यांगता की तरफ चली जाती है । इसलिए सही ऑर्थोसिस एवं प्रोस्थेसिस से इलाज के लिए अपने नजदीकी किसी भी कृत्रिम अंग केंद्र में ऐसे लोगों को समय रहते ही रिहैबिलिटेशन कौंसिल ऑफ़ इंडिया ( RCI) से पंजीकृत योग्य विशेषज्ञ से इलाज करवा देना चाहिए तथा जन सामान्य को भी इस बात का पता होना चाहिए कि किस विकृति को ठीक करने के लिए किस विशेषज्ञ के पास जाना चाहिए । भारतीय पुनर्वास परिषद अधिनियम ( RCI Act 1992) के अनुसार उचित योग्यता एवं भारतीय पुनर्वास परिषद के पंजीकरण के बिना अभ्यास करना भारतीय पुनर्वास परिषद अधिनियम संख्या 34 ,1992 की धारा 13 (3) के तहत दंडनीय अपराध है.
जैसा कि आप सबको विदित हैं कि भारत हर क्षेत्र में तरक्की कर रहा है और पिछले दो दशकों से शारीरिक दिव्यांगजन को सही पुनर्वास एवं उच्च तकनीक के कृत्रिम अंग इस्तेमाल करने की वजह से दिव्यांगजन हर क्षेत्र में अग्रणीय भूमिका निभा रहे हैं, केवल देश में ही नहीं विदेश में भी एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दिव्यांगजन ख्याति प्राप्त कर रहे हैं । जिसका ताजा उदाहरण पैरा ओलंपिक गेम में दिव्यांग जनों द्वारा भारत का नाम रोशन कर नई कीर्तिमान स्थापित किए गए हैं, जिसमें प्रोस्थेटिक्स और ऑर्थोटिक्स विशेषज्ञ का महत्वपूर्ण भूमिका है .
जब मनुष्य 50 -60 से ऊपर की आयु में पहुंचता है तो उसे शारीरिक संबंधित विभिन्न परेशानी घेरने लगते हैं जैसे कि घुटने के दर्द, कमर में दर्द , पांव एवं एड़ी में दर्द , चलने में परेशानी , उठने बैठने में परेशानी ऐसे अनेक आयु जनित परेशानी से गुजरना पड़ता है . उन्हें सही विशेषज्ञ परामर्श एवं सहायक उपकरण की व्यवहार से उनकी परेशानी काफी हद तक काम हो सकती है. सही सहायक उपकरण से उनके जीवन शैली में बदलाव ला सकते हैं ताकि वह सुगमता से अपने दिनचर्या कर सके और अपने खोए हुए आत्मविश्वास के साथ जी सके.
हमें बताते हुए खुशी हो रही है फरीदाबाद में इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी एवं भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम ( ALIMCO) के प्रयास के तहत हरियाणा एवं फरीदाबाद में बहुत सारा दिव्यांग एवं वृद्धाजन की जिंदगी आसान बनाया गया है. माननीय मंत्री श्री कृष्ण पाल गुर्जर जी के प्रयास के माध्यम से ALIMCO की एक स्टेट ऑफ आर्ट प्रोस्थेटिक सेंटर फरीदाबाद तिगांव मैं ( IMT के पास ) खोला गया है. जिस पर कोई भी दिव्यांग एवं वृद्धाजन ओपीडी में जाकर सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार के एडीपी एवं आरबीआई योजना से निशुल्क कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण जैसे गर्दन के लिए सर्वाइकल कॉलर, कमर के लिए एलएस बेल्ट, एलएस कॉरसेट, घुटने के लिए घुटने के बेस, पैरों के लिए फुट ऑर्थोसिस एवं चलने फिरने के लिए वॉकिंग एड्स जैसे छड़ी, बैसाखी, वॉकर, ट्राइपॉड,क्वाड्रा पोर्ट, वाकिंग स्टिक सीट के साथ , व्हीलचेयर, कमोड चेयर, सिलिकॉन कुशन, बैटरी ऑपरेटेड व्हीलचेयर, मोटराइज्ड ट्राईसाईकिल, कान की मशीन , TLM किट, ब्लाइंड स्टिक , ब्रेल किट, मोबाइल फोन आदि प्राप्त कर सकते हैं . भारत सरकार की सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के प्रयास से हर जिले में प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्र केंद्र खोलने की प्रयास किया जा रहा है जहां से प्रोस्थेटिक्स और ऑर्थोटिक्स विशेषज्ञ के परामर्श से कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण प्रदान किया जाएंगे.
शारीरिक विकृति से होने वाले नुकसान एवं दिव्यांगता को बचाने के लिए आप सबसे प्रार्थना है कि आप अपनी समाज में जन सहभागिता सुनिश्चित करने की कृपा करेंगे एवं समाज में दिव्यांगता न हो इसके लिए आप सब- हम सब मिलकर कोशिश करेंगे. और सरकार से अनुरोध है कि हर हर जिले के अस्पताल में प्रोस्थेटिक्स और ऑर्थोटिक्स विशेषज्ञ के नियुक्ति दें ताकि दिव्यांगजन और वृद्धाजन की जीवन आसान हो जाए.
आज की इस प्रेस वार्ता में पधारे हुए सभी पत्रकार बंधु एवं छायाकार मित्रों ने जो अपना कीमती / बहुमूल्य समय यहां पहुंच कर दिया है इसके लिए भी हम आप सभी का हृदय की गहराई से बहुत-बहुत धन्यवाद एवं स्वागत करते हैं आप सभी का सहयोग भविष्य में भी हमें इसी प्रकार मिलता रहे ऐसी शुभकामनाओं के साथ एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय प्रोथेटिस्ट ऑर्थोटिस्ट दिवस की मंगल कामनाएं .




