जे.सी. बोस विश्वविद्यालय के कुलपति ने किया भारतीय पर्व एवं त्यौहारों की महत्ता पर आधारित पुस्तक का विमोचन

FARIDABAD : जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद के कुलपति प्रो. सुशील कुमार तोमर ने भारत में विभिन्न पर्व एवं त्यौहारों की महत्ता पर आधारित पुस्तक ‘भारतीय त्यौहार और सामाजिक संवाद’ का विमोचन किया, जिसे डाॅ. पवन सिंह तथा डाॅ अमरेन्द्र कुमार आर्य द्वारा संपादित किया गया है।
कुलपति प्रो. तोमर ने दोनों लेखकों को उनकी पुस्तक के लिए शुभकामनाएं दी तथा भारतीय पर्व एवं त्यौहारों की महत्ता पर आधारित पुस्तक प्रकाशित करने की पहल को सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि सामाजिक एवं सांस्कृतिक विविधता के बावजूद भारतीय त्यौहार ही है जो समाज में समता, समानता, सद्भाव और भाईचारे को प्रोत्साहित करते है और विविधता में एकता के रूप में राष्ट्रीय अखंडता का मूल आधार है। उन्होंने कहा कि साहित्य, विशेष रूप से पुस्तक-पुस्तिकाएं समाज में बदलाव लाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने पुस्तक की सफलता की कामना करते हुए कहा कि पुस्तक में सारबद्ध भारतीय पर्व एवं त्यौहारों की महत्ता का संदेश आने वाली पीढ़ी को भारत की सांस्कृतिक विरासत से अवगत करवायेगा।
मीडिया क्षेत्र में लगभग 15 वर्षों का अनुभव रखने वाले डाॅ. पवन सिंह जे.सी. बोस विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर है तथा मीडिया एवं संचार प्रौद्योगिकी विभाग के अध्यक्ष है। इससे पूर्व, नागरिक पत्रकारिता विषय पर उनकी पुस्तक प्रकाशन हो चुकी है। राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित शोध पत्रिताओं में उनके 30 से ज्यादा शोध-पत्र एवं आलेख प्रकाशित है। डाॅ अमरेन्द्र कुमार आर्य दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स, दिल्ली विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर है। सक्रिय पत्रकारिता के साथ-साथ अकादमिक क्षेत्र में अनुभव रखने वाले डाॅ आर्य ने भोजपुरी लोकगीतों में सामाजिक समरसता विषय पर शोध किया है। इससे पूर्व, स्वामी विवेकानंद का संवाद कौशल विषय पर उनकी पुस्तक प्रकाशित हो चुकी है। राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित शोध पत्रिताओं में उनके शोध-पत्र एवं आलेख प्रकाशित है तथा वे कई पुस्तकों का संपादन कार्य कर चुके है।
पुस्तक के संपादक डाॅ. पवन सिंह ने बताया कि पुस्तक का प्रकाशन बालाजी पब्लिकेशन द्वारा किया गया है। पुस्तक की विषय-सूची में भारत में मनाये जाने वाले विभिन्न पर्व एवं त्यौहारों की महत्ता पर प्रतिष्ठित लेखकों के लेखों को 17 अध्यायों में संकलित किया गया है, जिसमें विभिन्न भारतीय त्यौहार एवं पर्व जैसे होली, रामलीला, छठ, गोधन, गौरा-गौरी पूजन, लोहड़ी, पोला एवं कुम्भ के संदर्भ तथा उत्सवों के माध्यम से सामाजिक बदलाव, भारतीय पर्व-परम्पराएं, हरियाणवी लोकनृत्य, संवाद एवं सामाजिक समरसता और इस्लामिक समाज की संस्कृति एवं परम्पराएं पर लेख शामिल हैं।

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