अनंगपुर में शुरू हुई पीएलपीए-अरावली क्षेत्र की ग्राउंड ट्रुथिंग, 1500 मकानों का होगा सर्वे
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद प्रशासन की कार्रवाई तेज, पांच दिनों तक घर-घर जाकर जांच करेंगी टीमें
भावना कौशिश,फरीदाबाद। अरावली और पीएलपीए क्षेत्र से जुड़े सुप्रीम कोर्ट में लंबित फॉरेस्ट मामले को लेकर गांव अनंगपुर में प्रशासन ने ग्राउंड ट्रुथिंग प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस प्रक्रिया के तहत करीब 1500 चिन्हित मकानों की वास्तविक स्थिति का सत्यापन किया जाएगा। इसके लिए प्रशासन और विभिन्न विभागों की संयुक्त टीमें अगले पांच दिनों तक घर-घर जाकर निरीक्षण करेंगी।
बुधवार को बड़खल के एसडीएम त्रिलोक चंद, तहसीलदार नेहा, वन विभाग के अधिकारी अफजल, राजस्व विभाग, बिजली विभाग और अन्य संबंधित विभागों की टीमें गांव अनंगपुर पहुंचीं। अधिकारियों ने ग्रामीणों के साथ बैठक कर पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस और सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) के निर्देशों के अनुसार सैटेलाइट और गूगल इमेज के माध्यम से सर्वे कराया गया था। इस सर्वे में गांव अनंगपुर के लगभग 1500 मकानों को पीएलपीए आबादी क्षेत्र में चिन्हित किया गया है। अब इन निर्माणों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए ग्राउंड ट्रुथिंग की जा रही है।
एसडीएम त्रिलोक चंद के निर्देश पर फॉरेस्ट, रेवेन्यू और अन्य विभागों की अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं, जो निरीक्षण के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेंगी। प्रशासन का कहना है कि रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि इस प्रक्रिया से वर्षों पुराने मकानों और वास्तविक आबादी की स्थिति स्पष्ट होगी तथा लोगों को राहत मिल सकेगी। ग्रामीणों का कहना है कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, बड़खल विधायक धनेश अदलखा और पार्षद वीरेंद्र भड़ाना द्वारा उन्हें न्याय दिलाने का आश्वासन दिया गया था और अब प्रशासनिक स्तर पर सकारात्मक पहल दिखाई दे रही है।
गौरतलब है कि अनंगपुर, अनखीर, लक्कड़पुर और मेवला महाराजपुर गांव लंबे समय से पीएलपीए और अरावली क्षेत्र में अवैध निर्माण के आरोपों को लेकर चर्चा में रहे हैं। वर्ष 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब लैंड प्रिजर्वेशन एक्ट (PLPA) के तहत संरक्षित जमीन को वन भूमि मानते हुए अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए थे।
इसके बाद हरियाणा सरकार द्वारा कराए गए सर्वे में चार गांवों में करीब 6793 अवैध निर्माण चिन्हित किए गए थे, जिनमें सबसे अधिक निर्माण अनंगपुर गांव में पाए गए। हाल के महीनों में वन विभाग और जिला प्रशासन द्वारा कई इलाकों में तोड़फोड़ अभियान भी चलाया गया था।
हालांकि, सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट को सुझाव दिया था कि वास्तविक आबादी वाले गांवों और व्यावसायिक अवैध निर्माणों में अंतर किया जाए, ताकि ग्रामीणों के अधिकार प्रभावित न हों।




