बुलडोजर के आगे बेबस दिखे लोग: सेक्टर-16 में अतिक्रमण हटाओ अभियान पर उठे पक्षपात के सवाल
ग्रीन बेल्ट और सरकारी जमीन से हटाए गए अवैध कब्जे, प्रभावित लोगों ने कहा- गरीबों पर चली कार्रवाई, रसूखदारों को मिली राहत
भावना कौशिश,फरीदाबाद । फरीदाबाद के सेक्टर-16 में गुरुवार को नगर निगम और हुडा विभाग द्वारा संयुक्त रूप से अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। इस दौरान ग्रीन बेल्ट और सरकारी भूमि पर किए गए अवैध कब्जों को हटाने के लिए बुलडोजर चलाए गए। कार्रवाई के दौरान कई खोखे, अस्थायी दुकानें और अन्य निर्माण ध्वस्त कर दिए गए। मौके पर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल भी तैनात रहा।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने और शहर में बढ़ते अतिक्रमण पर रोक लगाने के उद्देश्य से की गई। नगर निगम और हुडा विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ग्रीन बेल्ट और सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और आने वाले दिनों में भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे।
हालांकि कार्रवाई के दौरान कई प्रभावित लोगों की आंखों में आंसू दिखाई दिए। जिन लोगों के खोखे और छोटी दुकानें हटाई गईं, उनका कहना था कि उनकी वर्षों पुरानी रोजी-रोटी एक झटके में खत्म हो गई। कई लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया और वे अपना सामान भी पूरी तरह नहीं निकाल पाए, जिसके कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
प्रभावित लोगों का यह भी आरोप है कि कार्रवाई के दौरान समानता नहीं बरती गई। उनका कहना है कि गरीब और छोटे दुकानदारों के खिलाफ सख्ती दिखाई गई, जबकि कुछ प्रभावशाली लोगों को पहले से सूचना और समय मिल गया। हालांकि इन आरोपों की प्रशासनिक स्तर पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कार्रवाई के दौरान कुछ लोग अधिकारियों से समय देने की गुहार लगाते रहे, लेकिन अभियान लगातार जारी रहा। भारी पुलिस बल की मौजूदगी के कारण कोई बड़ा विरोध प्रदर्शन नहीं हो सका। प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनके सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है और प्रशासन को उनके पुनर्वास या वैकल्पिक व्यवस्था पर भी विचार करना चाहिए।

नगर निगम और हुडा विभाग ने दोहराया है कि शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने का अभियान आगे भी जारी रहेगा। वहीं दूसरी ओर प्रभावित लोग प्रशासन से न्याय और राहत की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल सेक्टर-16 में हुई इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है, लेकिन इसके साथ-साथ उन लोगों की समस्याओं और पुनर्वास पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए, जिनकी आजीविका ऐसे ढांचों पर निर्भर रही है।




