फरीदाबाद में ‘डॉग डेंजर’! चार दिन में 20 लोग घायल

भावना कौशिश,फरीदाबाद। शहर में आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक लोगों के लिए बड़ी चिंता का विषय बनता जा रहा है। पिछले चार दिनों के दौरान जिला नागरिक अस्पताल में कुत्तों के काटने के 20 मामले दर्ज किए गए हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं के बावजूद नगर निगम की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

सबसे गंभीर स्थिति सेक्टर-70 स्थित मलबेरी काउंटी सोसायटी की है, जहां दर्जनों आवारा कुत्ते खुलेआम घूम रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सोसायटी में करीब 40 से अधिक कुत्ते हैं, जो आए दिन बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों पर हमला कर रहे हैं। इससे परिवारों में भय का माहौल बना हुआ है और लोग बच्चों को अकेले बाहर भेजने से भी डर रहे हैं।

हाल ही में सोसायटी निवासी धीरेंद्र सिंह और सरिता के 10 वर्षीय बेटे पार्थ पर एक आवारा कुत्ते ने हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। हमले में उसके सिर और कमर पर गहरी चोटें आईं, जिसके बाद उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इलाज के बाद पार्थ को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है, लेकिन घटना के बाद भी सोसायटी के लोगों में दहशत बरकरार है।

घटना के बाद नगर निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर आठ कुत्तों को बंध्याकरण के लिए पकड़ा, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि आक्रामक कुत्ते अब भी सोसायटी में घूम रहे हैं। उनका कहना है कि केवल बंध्याकरण से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि लोगों की सुरक्षा के लिए ऐसे कुत्तों को शेल्टर होम में रखा जाना चाहिए।

रविवार को सोसायटी की महिलाओं ने समस्या के विरोध में प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि सोसायटी का एक गेट लंबे समय से टूटा हुआ है, जिससे पास के मुजैड़ी गांव से आवारा कुत्ते आसानी से अंदर आ जाते हैं। उन्होंने बिल्डर और नगर निगम से गेट की मरम्मत कराने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की।

यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले फरवरी में छह वर्षीय वेदांत पर भी दो आवारा कुत्तों ने हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया था। उसके परिवार ने नगर निगम से शिकायत भी की थी, लेकिन बंध्याकरण के अलावा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। परिणामस्वरूप आज भी सोसायटी के लोग उसी समस्या का सामना कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि फरीदाबाद में आवारा कुत्तों के लिए कोई स्थायी शेल्टर होम नहीं है। नगर निगम की ओर से एनजीओ के माध्यम से कुत्तों का बंध्याकरण और टीकाकरण तो कराया जाता है, लेकिन बाद में उन्हें उसी इलाके में छोड़ दिया जाता है, जिससे लोगों की परेशानी कम होने के बजाय बनी रहती है।

नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि आवारा और आक्रामक कुत्तों के लिए अलग शेल्टर होम बनाया जाए, संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाया जाए और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थायी समाधान निकाला जाए।

Related Articles

Back to top button